| अप्रैल फूल यानी चेरी ब्लॉसम या सकूरा - जो साल में केवल हफ़्ते भर खिलते हैं. |
Sunday, April 01, 2007
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जैसे चींटियाँ लौटती हैं बिलों में / कठफोड़वा लौटता है काठ के पास /
ओ मेरी भाषा! मैं लौटता हूँ तुम में
जब चुप रहते-रहते अकड़ जाती है मेरी जीभ / दुखने लगती है मेरी आत्मा
-केदारनाथ सिंह
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5 comments:
सही है.
बड़ा खूबसूरत फूल है भाई!
मैं तो अप्रैल फूल ही बनने के लिये यहां आया। यह तो सच निकला। इसी में अप्रैल फूल बन गया।
चलिये कम से कम फूल ने फ़ूल नहीं बनाया :)
हे हे हे ! ... क्या फूल बनाया :)
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