
फ़्रैंकफ़र्त में २००६ का पुस्तक मेला चल रहा है और भारत सम्माननीय अतिथि है। मेले और भारतीय साहित्यिक परिदृष्य पर हिंदी में एक वेबसाइट भी बनाई गई है। पर बात यहीं तक सीमित नहीं है। मुख्य मीडिया भी उत्साहित दिखाई देता है। जर्मन अख़बार डी टागसज़ाइटुंग ने अपने कल (४ अक्टूबर) के अंक का मुखपृष्ठ अपने नाम के नागरी रूप के साथ छापा है। देखिये जर्मन और हिंदी का मेल (पीडीएफ़ प्रारूप)।
(छवि सौजन्य: साँभर माफ़िया)
Thursday, October 05, 2006
जर्मनागरी
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v9y
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9:18 pm
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8 comments:
बड़े दिनों बाद इस किस्म की आह्लादकारी खबर दिखी!
काम की कड़ी दी है, धन्यवाद। इंडियागेस्ट वाली साइट हिन्दी में भी है, पर किसी कारणवश मसौदा देखने के लिए बहुत नीचे स्क्रोल करना पड़ता है।
आपने तो काफी अच्छी खबर/कडी दी। शुक्रीया।
पढ़ कर अच्छा लगा
bahot acche
bahot acche.
इस पुस्तक मेले में कोलकाता से महाश्वेता देवी,सुनील गंगोपाध्याय और 'कलिकथा वाया बाइपास' उपन्यास की लेखिका अलका सरावगी भी गई थीं . सुप्रसिद्ध हिन्दी कवि लीलाधर जगूड़ी जो उससे कुछ दिन पहले हमारे संस्थान में स्वर्ण जयंती व्याख्यान देने आये थे वे भी गये थे.साहित्य अकादमी,नेशनल बुक ट्रस्ट,तथा भारत सरकार के अन्य प्रतिष्ठानों की ओर से लगभग 500 भारतीय लेखक गण वहां जुटे थे ऐसा समाचार मिला है.
hey vinay:
can you please post a primer on blogging in hindi?
thanks.
- s.b.
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