Thursday, October 05, 2006

जर्मनागरी


फ़्रैंकफ़र्त में २००६ का पुस्तक मेला चल रहा है और भारत सम्माननीय अतिथि है। मेले और भारतीय साहित्यिक परिदृष्य पर हिंदी में एक वेबसाइट भी बनाई गई है। पर बात यहीं तक सीमित नहीं है। मुख्य मीडिया भी उत्साहित दिखाई देता है। जर्मन अख़बार डी टागसज़ाइटुंग ने अपने कल (४ अक्टूबर) के अंक का मुखपृष्ठ अपने नाम के नागरी रूप के साथ छापा है। देखिये जर्मन और हिंदी का मेल (पीडीएफ़ प्रारूप)।

(छवि सौजन्य: साँभर माफ़िया)

8 comments:

Raviratlami said...

बड़े दिनों बाद इस किस्म की आह्लादकारी खबर दिखी!

Raman Kaul said...

काम की कड़ी दी है, धन्यवाद। इंडियागेस्ट वाली साइट हिन्दी में भी है, पर किसी कारणवश मसौदा देखने के लिए बहुत नीचे स्क्रोल करना पड़ता है।

Mitul said...

आपने तो काफी अच्छी खबर/कडी दी। शुक्रीया।

उन्मुक्त said...

पढ़ कर अच्छा लगा

ExoticPrincess said...

bahot acche

ExoticPrincess said...

bahot acche.

प्रियंकर said...

इस पुस्तक मेले में कोलकाता से महाश्वेता देवी,सुनील गंगोपाध्याय और 'कलिकथा वाया बाइपास' उपन्यास की लेखिका अलका सरावगी भी गई थीं . सुप्रसिद्ध हिन्दी कवि लीलाधर जगूड़ी जो उससे कुछ दिन पहले हमारे संस्थान में स्वर्ण जयंती व्याख्यान देने आये थे वे भी गये थे.साहित्य अकादमी,नेशनल बुक ट्रस्ट,तथा भारत सरकार के अन्य प्रतिष्ठानों की ओर से लगभग 500 भारतीय लेखक गण वहां जुटे थे ऐसा समाचार मिला है.

Anonymous said...

hey vinay:

can you please post a primer on blogging in hindi?

thanks.

- s.b.