आधुनिक हिंदी साहित्य के मेरे सबसे पसन्दीदा लेखक मनोहर श्याम जोशी नहीं रहे। कमलेश्वर के शब्दों में 'यह हिंदी जगत के लिए एक हादसा है'। क्षति इसलिये भी परम दुखदायी है कि वे कई कृतियों पर कार्य कर रहे थे और पूरी तरह सक्रिय थे।
२००५ के साहित्य अकादमी पुरस्कार की प्राप्ति के अवसर पर उन पर लिखा एक परिचयात्मक लेख
Thursday, March 30, 2006
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v9y
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7:48 AM
2006-03-30T07:48:00-05:00v9y
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Friday, March 17, 2006
हिन्दी की खबरों की फ़ीड
ग्रॅब्लाइन - hindi.grabline.com - हिन्दी की खबरों की फ़ीडों का सङ्कलन।
अफ़सोस कि बीबीसी के अलावा कोई और अखबार फ़ीड देता नहीं है, वरना यह खबरों का अच्छा खासा भण्डार होता।
Posted by
आलोक
at
2:41 AM
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